Thursday, 9 October 2014

SOME Collection राजेश पुरुषोत्तम प्रसाद बहुगुणा JI KE SATH



मैं खुद बेचा करता था कभी दर्द-ऐ-दिलकी दवा...!
आज वक़्त ले आया है मुझे मेरी ही दूकान पर...!!


मैने कब कहा कि तुम कीमत समझो हमारी ?
हमें बिकना ही अगर होता तो यूं तन्हा नहीं होते......


ये रास्ते मेरी मंज़िल का पता पूछते हैं
राह के पत्थर से मेरे पैर ख़ता पूछते हैं
कुछ दूर मेरे साथ कोइ चला ही था कि
जमाने वाले हमसे उसका रिश्ता पूछते हैं
औरों के नक्श-ए-कदम पर चल न सका मैं
घर वाले उल्टा चलने की वजह पूछते हैं
खाने कमाने को मैने दिल से ना लिया
पूछने वाले मेरे जीने का मुद्दा पूछते हैं
"राजेश " के मन मुताबिक कुछ हुआ ही नहीं
और आप हमसे ज़िंदगी का मज़ा पूछते हैं..

तेरी याद ही मुझे अक्सर मजबूर करती हैं
वर्ना शायरी करना मुझे भी अच्छा नहीं लगता '

तलाश कर मेरी कमी को अपने दिल में ऐ दोस्त |
दर्द हो तो समझ लेना कि महोब्बत अभी बाकी है ||

कितना मुश्किल है मनाना उस  शख्स को ..
जो रूठा भी ना हो और बात  भी ना करे ..!!

अब दिल की बात कहने के लिये हम
इशारों से काम लेते हैं,,
क्योंकि, तुम्हे
अपना समझने की खता हम कर चुके हैं..!

ये बात समझ में आई नहीं,
और मम्मी ने मुझे समझाई नहीं...
:

कैसे मीठी बात करूँ मैं ???
जब मीठी चीज़ मैंने कोई खाई नहीं...
:
ये चाँद क्यों मामू है मेरा ???
जब मम्मी का वो भाई नहीं...
:
क्यूँ लम्बे बाल हैं भालू के ???
क्या उसने ट्रिमिंग कराई नहीं...
क्या वो भी गन्दा बच्चा है ???
या जंगल में कोई नाई नहीं...
:
नाना की बीवी जब नानी है,
दादा की बीवी जब दादी है...
मामा की बीवी जब मामी है,
पापा की बीवी क्यूँ पापी नहीं...???
:
समंदर का रंग क्यूँ नीला है ???
जब नील किसी ने मिलाई नहीं...
:
जब स्कूल में इतनी नींद आती है...
तो क्यूँ बेड वहां रखवाई नहीं...???
:
ये बात समझ में आई नहीं,,,
और मम्मी ने समझाई नहीं..
.


कभी हम से भी पूछ लिया करो 
हाल ए दिल.......................
कभी हम भी ये कह सकें..... 
दुआ है आपकी...........

कोशिशें  ....लाख की मगर.... मोहोब्बत में सिर्फ....शायरी का ही हुनर आया..

शांत बैठा हुँ तो ये मत समझना कि आग नहीँ है मेरे अंदर,
डरता हुँ कहीँ समन्दर कम ना पड़ जाये बुझाने के लिये....।

चलो फिर से आज वो नज़ारा याद कर लें; 
शहीदों के दिल में थी जो ज्वाला वो याद कर लें; 
जिसमे बहकर आज़ादी पहुँची थी किनारे पे; 
देशभक्तों के खून की वो धारा याद कर लें।


कुछ इस तरह मैंने ज़िन्दगी 
को आसान कर लिया है 
किसी से माफ़ी मांग ली है 
किसी को माफ़ कर दिया है ,,,,

कदर करनी है तो जीते जी करो ए दोस्त...
अर्थी उठाते समय तो नफरत करने वाले भी रो पड़ते हैं